अलविदा सम्वत 2076, चैत्र नवरात्रि के साथ नव संवत्सर 2077 आज से

नोट नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करे या अपने नाम से संकल्प देकर कराए,

चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नूतन वर्ष अर्थात नव संवत्सर प्रारम्भ होता है। ‘प्रमादी’ नामक नव संवत्सर आरम्भ हो रहा है। इसी दिन से नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र में गुडी पडवा भी इसी दिन मनाया जाता है। साल के दो गुप्त और दो नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। कोई भी काम शुरू करने के लिहाज से नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में नौ दिन माता की पूजा अर्चना की जाती है।

वैसे तो पूरे दिन किसी भी समय घटस्थापना कर सकते हैं

लेकिन दिन में 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक कलश स्थापना अच्छा मुहूर्त है। सूर्य सिद्धान्त पर आधारित गणना के आधार पर उदया तिथि को ही नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है इसी कारण 25 मार्च 2020 दिन बुधवार को भारतीय संस्कृति का सर्वमान्य नववर्ष अर्थात् नव संवत्सर 2077 की शुरुआत होगी। यह प्रभवादि षष्टि संवत्सर चक्र का 47वाँ  संवत्सर है।

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News Reporter
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