राजनीति से परे मनमोहन सिंह ने दिया मोदी को ऐसा गुरुमंत्र

प्रसंगवश: राकेश पाठक

पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को बीजेपी मौनी बाबा के नाम से प्रचारित करती रही है। बीजेपी का यह भी कहना है कि, वह पीएम होकर भी निर्णय लेने में स्वतंत्र नहीं थे। बीजेपी उनको एक असफल पीएम भी साबित करने में लगी रही। जबकि, सच ये है कि, मनमोहन सिंह शैक्षणिक योग्यता की दृष्टि से देश के अब तक के सर्वाधिक योग्य पीएम रहे।

यही नहीं, वह एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री हैं। खबर है कि, उनकी लिखी चार किताबें दुनियां के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती हैं। उनकी योग्यता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि, जब वह पीएम थे तब न तो आज की तरह रुपया गिरा था और न जीडीपी।

आज डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार गिरना, जीडीपी निरंतर नीचे जाना, बेरोजगारी का बढ़ना, बंद होते कारखाने, किराए पर जा रहा लाल किला और रेलवे स्टेशन तथा विश्व बैंक द्वारा भारत को विकासशील देशों की सूची से हटाया जाना आदि जो भयावह हालात देश को झेलना पड़ रहे हैं, वे सब केवल मनमोहन सिंह की नीतियों को भुलाने का दुष्परिणाम हैं।

देश को इस चिंतनीय हालत से बाहर लाने के उद्देश्य से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजेपी द्वारा खुद के लिए कही गई सारी अच्छी बुरी बातों को भुलाकर और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बीजेपी सरकार और पीएम नरेन्द्र मोदी को एक ऐसा संदेश दिया है, जिसे अगर पीएम मोदी स्वीकार कर लें हालात बदलते देर न लगेगी। यह संदेश वाकई गुरुमंत्र कहा जा सकता है।

बता दें कि, पूर्व पीएम सिंह ने देश को 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पीएम मोदी को यह मंत्र दिया है। उन्होंने कहा है कि एलपीजी (यानी उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों) पर आधारित आर्थिक सुधार जारी रखकर ही रणनीति बनाकर भारत को 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जा सकता है।

गत दिवस मनमोहन सिंह जयपुर में एक निजी विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। वह जब संबोधन के लिए मंच पर जा रहे थे तो छात्रों के एक गुट ने राजनीति की, मोदी के समर्थन में नारे लगाए। लेकिन उन्होंने दलगत राजनीति पर ध्यान ही न दिया।

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गरीबी, सामाजिक असमानता, सांप्रदायिकता और धार्मिक कट्टरवाद तथा भ्रष्टाचार लोकतंत्र के समक्ष कुछ प्रमुख चुनौतियां हैं। मनमोहन सिंह ने कहा, इस समय हमारी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती दिखती है। जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट आ रही है। निवेश की दर स्थिर है। किसान संकट में हैं। बैंकिंग प्रणाली संकट का सामना कर रही है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। भारत को 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए देश को एक अच्छी तरह से सोची-समझी रणनीति की जरूरत है।

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को टैक्स आतंकवाद रोकना चाहिए, भिन्न विचारों की आवाजों का सम्मान करना चाहिए और सरकार के हर स्तर पर संतुलन बनाना चाहिए। उदारीकरण की नीतियों पर खड़े किए गए आर्थिक सुधारों को जारी रखना समय की मांग है। @राकेश पाठक

सम्पर्क : सम्वाददाता / ब्यूरो चीफ


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इस आलेख के लेखक इस वेबसाइट के सम्पादक व सीईओ राकेश पाठक हैं. इस आलेख का कॉपीराइट लेखक के पास है. इस वेबसाइट व यू ट्यूब चैनल के लगभग सभी खबरें तथा वीडियो आदि Dailyhunt, Google News, NewsDog, NewsPoint एवं UC News पर भी उपलब्ध हैं इसमें ज्यादातर चित्र सांकेतिक रहते हैं तथा इंटरनेट व सोशल मीडिया से उपयोग किए जाते हैं, इसलिए हम किसी कॉपीराइट का दावा नहीं करते. सम्पर्क: Mobile / WhatsApp : 91-9993069079 E-Mail : rapaznewsco@gmail.com
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