बड़ी खबर; RTI कानून को खत्म करने की तैयारी में सरकार, पूर्व CIC ने सांसदों को लिखा पत्र

महत्वपूर्ण तथ्य:

सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है

आरटीआई एक्ट यानि सूचना का अधिकार भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों – कर्मचारियों को आफत जान पड़ता है. मालूम हो इसके कारण कई बड़े घोटाले उजागर हो चुके हैं और कई सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर चुका है तो कई आरटीआई कार्यकर्ताओं को जान से हाथ भी धोने पड़े हैं.

इसी से आभाष होता होता है कि, यह कानून भ्रष्टों की नींद छीन रहा है, इससे अधिकारी – कर्मचारी ही नहीं सरकारें भी परेशान हैं. यही कारण है कि, केन्द्र की मोदी सरकार इसे कमजोर करने की तैयारी में है. खबरों के मुताबिक जल्द ही इसके लिए संशोधन विधेयक लाया जावेगा.

इस कानून का मौजूदा स्वरूप बचाने के लिए पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने सभी सांसदों को एक पत्र लिखकर अपील की है. उन्होंने कहा है-  ‘मैं संसद के प्रत्येक सदस्य से अनुरोध करता हूं कि वह आरटीआई को बचाएं और सरकार को सूचना आयोगों और इस मूल्यवान अधिकार को मारने की अनुमति न दें.’

यदि आरटीआई संशोधन विधेयक पारित हो जाता है तो केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी), सूचना आयुक्तों और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्तों के वेतन और कार्यकाल में बदलाव करने की अनुमति केंद्र को मिल जाएगी. आरटीआई कानून के मुताबिक एक सूचना आयुक्त का कार्यकाल पांच साल या 65 साल की उम्र, जो भी पहले पूरा हो, का होता है.

अभी तक मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का वेतन मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के वेतन के बराबर मिलता था. वहीं राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त का वेतन चुनाव आयुक्त और राज्य सरकार के मुख्य सचिव के वेतन के बराबर मिलता था.

आचार्युलु ने अपने पत्र के जरिए आगाह किया है कि मोदी सरकार सूचना आयोगों को मिले वैधानिक सुरक्षा को खत्म कर देगी और इसकी वजह से आयोग की स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता सरकारी वभागों की कठपुतली बनकर रह जाएगी.

मालूम हो कि, सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयोग सूचना पाने संबंधी मामलों के लिए सबसे बड़ा और आखिरी संस्थान है, हालांकि सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

सबसे पहले आवेदक सरकारी विभाग के लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन करता है. अगर 30 दिनों में वहां से जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपना आवेदन भेजता है.

अगर यहां से भी 45 दिनों के भीतर जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना के आयोग की शरण लेता है. लेकिन देश भर के सूचना आयोग की हालात बेहद खराब है.

 

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1 thought on “बड़ी खबर; RTI कानून को खत्म करने की तैयारी में सरकार, पूर्व CIC ने सांसदों को लिखा पत्र

  1. क्या सरकार भ्रष्टाचार बढ़ना चाहती है

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