ट्रांसफर रुकवाने सिंधिया की शरण में पहुंचे इंजीनियर ने बताया दूसरे इंजीनियर का नाम; फोटो वायरल

विशेष प्रतिनिधि
मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अचानक उस समय हलचल मच गई जब पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के प्रतिष्ठित नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ एक चर्चित इंजीनियर का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. यह इंजीनियर हैं प्रदीप अष्टपुत्रे.

फोटो के साथ एक छोटी सी खबर भी वायरल हो रही है जिसके अनुसार इंजीनियर अष्टपुत्रे अपना तबादला निरस्त कराने श्री सिंधिया की शरण में पहुंचे हैं.

बता दें कि, यह इंजीनियर पिछले कई सालों से ग्वालियर में लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (PIU) में बतौर डायरेक्टर सालों से पदस्थ हैं. लोनिवि की इस इकाई पीआईयू को हर साल करोड़ों का बजट मिलता है. इसके चलते इसे इंजीनियरों और नेताओं की नजर में सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझा जाता है.

यही कारण है कि कोई इंजीनियर या दूसरा कर्मचारी यहां से हटना नहीं चाहता. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार पीआईयू में जमे रहने के लिए ये सभी हमेशा अपने उच्चाधिकारियों सत्ताधारी दल के नेताओं से जुगाड़ बनाए रखते हैं. बताया जाता है कि, यही एक कारण है कि पिछले कई सालों से इंजीनियर अष्टपुत्रे सालों से यहां जमे हैं.

लेकिन अब हालात बदल गए. सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद विभाग में उच्चाधिकारी भी बदल गए, भाजपाकाल में काम आने वाले सम्पर्क भी बेकाम हो गए और तबादला सूची में इंजी अष्टपुत्रे का नाम छप गया.

चर्चा है कि, आनन फानन इंजी अष्टपुत्रे ने अपने पूर्व परिचित सिंधिया गुट के माने जाने वाले दो कांग्रेस नेताओं से सम्पर्क साधा. ये नेता पहले विधानसभा टिकट की जुगाड़ में रहे और अब जीडीए, साडा, या मेला जैसी किसी जुगाड़ में बताए जाते हैं. सूत्रों की मानें तो इंजी अष्टपुत्रे ने इन्हें यह समझाया भी है कि- आप लोग सत्ता न होने से पिछले पंद्रह साल से बेरोजगारों जैसी हालत में हो, टिकट भी न मिला, निगम – मंडल में की आशा में कब तक बैठे रहोगे, मेरा ट्रांसफर रुकवा लो तो सब ठीक हो जाएगा.

चर्चा है कि, इसके बाद इंजी अष्टपुत्रे भोपाल पहुंचे, अपने उच्चाधिकारियों से मुलाकात की. ये नेता भी भोपाल पहुंचे और संयोग से इसी बीच सिंधिया भी भोपाल पहुंच गए.

सूत्रों की मानें तो यहां इंजी अष्टपुत्रे ने साथ के नेताओं से कहा कि, महाराज से बात कर लो, वे सीएम से कह दें तो तत्काल काम बन जावेगा. जवाब में नेताओं ने कहा कि- महाराज तो कभी ऐसे कामों में बोलते ही नहीं. तब इंजी अष्टपुत्रे ने उन्हें बताया कि, मेरा ट्रांसफर रुकवाने की महाराज से नहीं कह सकते तो यह तो कह सकते हो कि, मुझे पीआईयू से ब्रिज में करा दो, उसमें भी तो जादौन कई सालों से हैं. इसके बाद नेता लोग सिंधिया से मिले, क्या बात हुई, यह तो पता नहीं लगा लेकिन वायरल हुए फोटो ने सब गड़बड़ कर दी.

भोपाल से ग्वालियर तक सबको दोनों इंजीनियरों का मामला पता चल गया. अब अगर इंजी अष्टपुत्रे का तबादला निरस्त होता है या उनको इंजी जादौन का स्थान पर सेतु निगम में पदस्थ किया जाता है तो यह माना जा सकता है कि, इंजी अष्टपुत्रे की जुगाड़ सफल हो गई. इससे विपक्ष को तबादलों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का मौका मिल जावेगा.

इंजी अष्टपुत्रे के वायरल हुए इस फोटो ने इंजी जादौन के भी चर्चा में ला दिया. दरअसल, हाल ही में मध्यप्रदेश में प्राय: सभी विभागों में हुए ताबड़तोड़ तबादलों में इंजी अष्टपुत्रे तो न बच सके लेकिन लोनिवि के सेतु निगम में सालों से पदस्थ कार्यपालन यंत्री एम एस जादौन पर कोई असर नहीं हुआ. चर्चाओं के अनुसार इंजी अष्टपुत्रे ने साथ के नेताओं को यह भी बताया है कि जादौन साब को हटाना महाराज के लिए भी मुश्किल होगी, वे (केन्द्रीय मंत्री का नाम) और (एक मप्र के वरिष्ठ मंत्री का नाम) के खास हैं, वैसे आरएसएस से भी जुड़े हैं.

फोटो के कारण मामला तूल पकड़ चुका है, इंजी अष्टपुत्रे की भोपाल यात्रा का क्या परिणाम होगा, यह तो आने वाला समय ही बताऐगा. उनसे चर्चा संभव नहीं हो सकी, उनके मोबाइल 94251196…. पर रिंग जाती रही. वायरल फोटो की वजह से रापाज न्यूज इस फोटो या खबर की सत्यता का दावा नहीं करता. चित्र में इंजी अष्टपुत्रे लाल घेरे में दिख रहे हैं.

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