कमलनाथ सरकार का ऐतिहासिक कदम; शनिवार व रविवार को भी चलेगी विधान सभा

जनहित के कार्य जल्दी पूरे करने की दृष्टि से मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने शनिवार व रविवार को भी विधान सभा की बैठकें करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय 8 व 9 जुलाई को ही लिया जा चुका था, जो अब मंजूर भी हो गया है। इसका महत्व इसी से समझा जा सकता है कि, अब तक विपक्ष सहित सभी इस मामले में ठीक उसी तरह चुप्पी साधे हैं जिस तरह गत दिवस विधान सभा में प्रस्तुत बजट पर चुप हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ही नहीं देश में भी यह दूसरी बार है जब शनिवार व रविवार को विधान सभा चलेगी। इसके पहले 1982 में भी ऐसा हो चुका है। संयोग यह कि, उस समय भी ऐसा मध्य प्रदेश में ही हुआ था और तब भी कांग्रेस की ही सरकार थी, उस दौरान स्व अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे।

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी एक बयान में प्रदेश की कमलनाथ सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की 8 जुलाई 2019 को संपन्न हुई बैठक की सिफारिशों को 9 जुलाई 2019 को सदन ने मंजूरी प्रदान की, जिसमें कमलनाथ सरकार का वह ऐतिहासिक निर्णय भी शामिल है, जिसमें छुट्टी के दिनों में भी जनहित का ध्यान रखते हुए विधानसभा की बैठकें आयोजित करने का फैसला लिया गया है।

श्रीमती ओझा ने कहा कि सदन ने कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिश को मंजूरी प्रदान करते हुए निर्णय लिया कि विधानसभा की जो बैठकें 15 एवं 16 जुलाई 2019 को होना निर्धारित की गई थीं, वे बैठकें अब शनिवार, 20 जुलाई एवं रविवार, 21 जुलाई 2019 को संपन्न होंगी। यह कमलनाथ सरकार का ऐतिहासिक फैसला है। इस निर्णय से यह भी साफ हो गया है कि कमलनाथ सरकार विधानसभा का सत्र चलाने व संवाद के साथ-साथ सकारात्मक और रचनात्मक सुझावों का चर्चा के जरिये न केवल स्वागत् करती है बल्कि संवाद के लिए अवसर भी प्रदान करती है।

श्रीमती ओझा ने कहा कि कांग्रेस ही वह पार्टी है, जो छुट्टी के दिन विधानसभा का सत्र चलाने का कार्य करने की मंशा रखती आई है। यहां यह उल्लेखनीय है कि अप्रैल 1982 में, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय भी छुट्टी के दिन विधानसभा की बैठक हुई थी और उसमें जनहित के कार्यों पर चर्चा के साथ ही महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये थे।

श्रीमती ओझा ने कहा कि जनहित को लेकर कांग्रेस पार्टी की पवित्र मंशा को दर्शाने वाले इस जनहितैषी निर्णय के ठीक उलट, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार सदन को चलाने में विश्वास नहीं रखती थी, तभी तो प्रदेश की जनता ने, उन्हें प्रतिपक्ष की भूमिका में पहुंचा दिया है और कांग्रेस पार्टी को माननीय कमलनाथ जी के नेतृत्व में सत्तापक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

श्रीमती ओझा ने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह निर्णय संसदीय पद्धति और प्रक्रिया के अंतर्गत लिया गया है। यह कार्य जहां संसदीय परंपरा और नियमों को नई ऊंचाई प्रदान करेगा, वहीं यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए लिया गया एक सुखद फैसला भी है।

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