दुनियांभर में पहचानी जाने लगी टिगरिया की हस्तशिल्प कला

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के ग्राम टिगरिया में इन दिनों हस्तकला की कई गतिविधियां चल रही है। जऱी ज़रदोज़ी, काष्ठ शिल्प, ढोकरा शिल्प आदि कार्यशालाओं में अलग-अलग कलात्मक वस्तुओं को बनाया जा रहा है, जिसमें ज़री के बटुओं को विशेष तौर पर तैयार किया जा रहा है। इन बटुओं की मांग भारत ही नहीं विदेश में भी है।

ये कलात्मक बटुए टिगरिया की पहचान बनाने वाले हैं। बटुओं की डिजाइन विशेष रूप से भोपाल से आए हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार कराईजा रही है। ये बटुए, पर्स हस्तकला प्रेमियों द्वारा बहुत पसंद किए जाते हैं। वे लोग उपहार स्वरूप अपने लोगों को ये बटुए भेंट करते हैं। बटुओं के साथ-साथ कुशन कवर, वॉल हेंगिंग, टीकोजी आदि का निर्माण भी यहां कराया जा रहा है।

कलेक्टर तेजस्वी एस. नायक एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल.त्यागी ने सोमवार को टिगरिया पहुंचकर यहां तैयार की जा रही हस्तकलाओं का अवलोकन किया साथ ही उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।

इस दौरान कलेक्टर ने इन हस्तकलाओं को बेहतर मार्केट उपलब्ध कराने के अधिकारियों को निर्देश दिए। नायक ने स्वयं के लिए भी ज़री से निर्मित सामग्री खरीदी। यहां स्थापित किए गए केन्द्र में हस्तशिल्प विभाग द्वारा काष्ठ शिल्प में लकड़ी के बुरादे से निर्मित वॉल हैंगिंग आदि तैयार करने का कार्य सिखाया जा रहा है।

बेल मेटल में पारंपरिक कला के साथ-साथ लकड़ी का उपयोग का कार्य भी सिखाया जा रहा है। इसके अलावा ढोकरा क्रॉफ्ट को वुड टर्निंग के साथ जोडक़र नए आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है।

भोपाल से विशेष रूप से पहुंची सुश्री जुलेखा हस्तशिल्पियों को बटुओं की डिजाइन सीखा रही है। उनके द्वारा तैयार करवाए जा रहे बटुए काफी आकर्षक हैं। क्रॉफ्ट विलेज की परिकल्पना को आकार दे रहे पूर्व मुख्य महाप्रबंधक हस्तशिल्प निगम एवं वर्तमान में क्रिस्प के एडवाइजर नागेन्द्र मेहता ने बताया कि टिगरिया ग्राम भौगोलिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां से महाराष्ट्र करीब है एवं यह राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ है। यहां के शिल्पी रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री आदि के वर्क ऑर्डर को पूरा कर सकते हैं। यहां विकास आयुक्त भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से एवं क्रिस्प द्वारा स्किल अप ग्रेडशन एवं इंटीग्रेटेड प्रोग्राम विभिन्न शिल्प में चलाए जा रहे हैं।

सहायक निदेशक एस.आर. मसराम (विकास आयुक्त हस्त शिल्प वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार) ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शिल्पियों के कला कौशल को विकसित करना एवं समाज की मुख्य धारा से जोडऩा है। वहीं क्रिस्प के सीईओ  मुकेश शर्मा भी टिगरिया को क्रॉफ्ट विलेज बनाने की पूरी तैयारी में लगे हैं। 

टिगरिया के मास्टर शिल्पी बलदेव वाघमारे ने बताया कि इन वर्कशॉप से हमें ऑर्डर भी प्राप्त हो रहे हैं। अभी हाल ही में ट्राई फेड से खरीदी के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। फिलहाल यहां ज़री क्रॉफ्ट एवं वुड क्रॉफ्ट आदि हस्तकलाओं में 20-20 महिलाएं एवं वुड क्रॉफ्ट में 40 महिलाएं हस्तकला का यह कार्य सीख रही हैं।

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