जाते जाते जमीनों का बंदरबांट कर गई भाजपा सरकार, मप्र को लगेगी सालाना 250 करोड़ की चपत

नगरीय क्षेत्रों में पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करने का प्रावधान समाप्त करने से मध्य प्रदेश सरकार को सालाना ढाई सौ करोड़ रुपए की चपत लग रही है। खास बात यह कि, 2018 में चुनाव से पहले तत्कालीन शिवराज सरकार ने भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर इस व्यवस्था को खत्म कर दिया था, जबकि शुरुआत भी उनकी सरकार में हुई थी।

कहा जाता है कि, सरकार ने भोपाल सहित कुछ जगहों पर लोगों द्वारा इसका फायदा उठाते हुए पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड कराने के बाद इसे बंद कर दिया था। सूत्रों की मानें तो तत्कालीन सरकार ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ही यह व्यवस्था बनाई थी, जिसे उद्देश्य पूरा होते ही हटा दिया गया। कहा जा सकता है कि, ऐसा कर जाते जाते तत्कालीन सरकार जमीनों का बड़ा बंदरबांट करने में सफल रही।

खजाने को भरने के जतन में जुटे वित्त विभाग ने जब राजस्व विभाग के जरिए होने वाली आय की पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि, सिर्फ इसी एक प्रावधान के खत्म होने से करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की चपत सालाना लग रही है।

इस व्यवस्था को पुन: लागू करने के उद्देश्य से विभागीय मंत्री तरुण भनोत ने इसे लेकर नोटशीट लिखी है, जिस पर सरकार ने भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष इंद्रनील शंकर दाणी की अध्यक्षता में समिति बना दी। अब समिति भू-राजस्व संहिता में हुए संशोधन और नए नियमों को मसौदा बनाकर सरकार को देगी ताकि पुन: जमीनों का पूर्व की तरह बंदरबांट न हो सके।

प्रदेश में नगरीय क्षेत्र में सरकार ने हाउसिंग सोसायटी और व्यक्तिगत तौर पर बड़े पैमाने पर जमीनें पट्टे पर दी है। अधिकांश मामलों में 30 साल में पट्टे का नवीनीकरण कराना होता है। इस झंझट से मुक्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2010 में भू-राजस्व संहिता में जमीन को एक निश्चित शुल्क देकर फ्री-होल्ड करने का प्रावधान किया था। हालांकि, इसका शुल्क काफी अधिक था।

इसके बावजूद भोपाल में अरेरा कॉलोनी सहित कई जगह लोगों ने जमीन को फ्री-होल्ड कराया। फीस घटाने को लेकर मांग उठी तो मामले का परीक्षण कर फीस कम कर दी गई, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2018 में शिवराज सरकार ने भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर धारा 181(क) में बदलाव कर दिया। इसके तहत संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद जमीन को फ्री-होल्ड कराने का अधिकार नहीं रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों में जमीन को फ्री-होल्ड कराने का प्रावधान है। इससे सरकार को निश्चित आय भी होती है। यही वजह है कि जब वित्त विभाग ने राजस्व विभाग के जरिए होने वाली आय की समीक्षा की तो पाया कि फ्री-होल्ड का प्रावधान खत्म होने से सालाना करीब ढाई सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

इसके चलते वित्त मंत्री तरुण भनोत ने मई 2019 में नोटशीट लिखकर राजस्व स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए विभाग को परीक्षण करने के लिए कहा। लगभग डेढ़ माह मंथन करने के बाद राजस्व विभाग ने भू-राजस्व संहिता में किए गए संशोधनों को नए सिरे से दिखाने के लिए भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष इंद्रनील शंकर दाणी की अध्यक्षता में समिति बना दी। समिति नियमों का परीक्षण करने के साथ नए नियम भी प्रस्तावित करेगी। 

फ्री-होल्ड से यह फायदा

पट्टे की जमीन के फ्री-होल्ड होने से उस पर काबिज व्यक्ति को भूमि स्वामी का अधिकार मिल जाएगा। अभी वह पट्टाधारक है और उसे 30 साल बाद पट्टे का नवीनीकरण कराना होता है। सामान्यत: इसमें लोग लापरवाही बरतते हैं और विलंब करते हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी होता है। 

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