राफेल के साथ सेना में शामिल होंगे अपाचे और चिनकू भी; जानिए खासियतें

लड़ाकू विमान राफेल का नाम तो हम सभी ने सुन रखा है। युद्ध के लिए महत्वपूर्ण इस विमान के नाम ने देश की राजनीति में उथल पुथल मचा रखी है। इसकी कई खासियतें भी आपने सुन रखी होंगी। जल्दी ही भारतीय वायु सेना के बाड़े में इसके शामिल होने की संभावना है।

इसके साथ ही सेना के बाड़े में अपाचे भी शामिल किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक राफेल विमान है तो अपाचे हैलीकॉप्टर। राफेल और अपाचे दोनों में यह समान खासियत है कि ये दोनों ही किसी भी स्थिति में दुश्मन की मजबूत किलेबंदी को भेद सकें।

इन दोनों के अलावा एक और नाम भी खास है- चिनकू। यह भी एक हैलीकॉप्टर है। इसकी खासियत यह कि, इसके प्रयोग से हमारी सेना दुर्गंम पहाड़ी स्थानों पर भी सुगमता से पहुंच सकेगी। पता लगा है कि, अभी तक वायु सेना को चार चिनकू मिल भी चुके हैं।

इस प्रकार राफेल, अपाचे और चिनकू देश व सेना दोनों के लिए खास हैं, तो आईए जानते हैं इनकी खासियतें कुछ विस्तार से:

राफेल फाइटर जेट:
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वायुसेना को 36 राफेल फाइटर जेट मिलने हैं. जिससे दो स्क्वॉड्रन बनेंगी। एक स्क्वॉड्रन अंबाला में और दूसरी बंगाल के हाशिमारा में। सितंबर में फ्रांस भारतीय वायुसेना को पहला राफेल विमान सौंप सकता है। इसके बाद राफेल फाइटर जेट पर वायुसेना के फाइटर पायलटों की ट्रेनिंग भी शुरू हो जाएगी।

राफेल फाइटर जेट में कई खासियतें हैं, यह लेह जैसे काफी ऊंचाई वाले इलाके से भी तुरंत टेकऑफ कर सकता है जिससे तैनाती में काफी कम वक्त लगेगा। इसमें वार्निंग सिस्टम है जो यह पता कर सकेगा कि कोई उसे ट्रेक तो नहीं कर रहा है, इसके अलावा इसमें मिसाइल हमले को नाकाम कर बच निकलने की क्षमता भी है। वायुसेना के पास अभी सबसे अच्छे फाइटर जेट सुखोई-30 है लेकिन राफेल की उड़ते हुए एक जगह तैनात रहने की क्षमता सुखोई से डेढ़ गुना ज्यादा है, जहां सुखोई की रेंज 400 से 550 किलोमीटर है वहीं राफेल की रेंज 780 से 1055 किलोमीटर है।

अपाचे हेलिकॉप्टर:
राफेल के साथ ही अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर भी एयरफोर्स की ताकत बढ़ाएंगे।अगले महीने इसकी पहली स्क्वॉड्रन पठानकोट में बनाई जाएगी। कुल 22 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर वायुसेना में शामिल होंगे। अपाचे हेलीकॉप्टर के बारे में बताया जाता है कि यह दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हेलीकॉप्टर माने जाते हैं, अपाचे दुश्मन की किलेबंदी को भेद कर उसकी सीमा में घुसकर हमला करने में सक्षम है, अपाचे में दो जनरल इलेक्ट्रिक T-700 टर्बोशेफ्ट इंजन हैं और आगे की तरफ एक सेंसर फिट है जिससे यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता ।

यह 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है, इतनी तेज गति होने की वजह से यह दुश्मन के टैंकों के परखच्चे आसानी से उड़ा सकता है। अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर में हेलीफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगीं हैं और दोनों ओर 30 एमएम की दो बंदूके हैं, किसी भी तरह का मौसम हो, किसी भी तरह की परिस्थिति हो, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर हर तरह से दुश्मन पर वार कर सकता है।

चिनूक हेलिकॉप्टर:
इसके अलावा 15 चिनूक हेलिकॉप्टर भी एयरफोर्स को मिल जाने से दुर्गम इलाकों में जाना आसान होगा। अभी 4 चिनूक हेलिकॉप्टर वायुसेना को मिल चुके हैं और पहली स्क्वॉड्रन चंडीगढ़ में बनी है।चिनूक हेलिकॉप्टर की मदद से सेना की टुकड़ियों और युद्ध से जुड़े हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद मिलेगी।

इससे दुर्गम इलाकों में सड़क बनाने के काम में मदद मिल सकती है। अभी तक वायुसेना के पास सिंगल रोटर इंजन वाले हेलिकॉप्टर हैं जबकि चिनूक में दो रोटर इंजन हैं। यह बेहद घनी पहाड़ियों में भी सफलतापूर्वक काम कर सकता है। छोटे हेलीपैड पर भी आसानी से लैंड कर सकता है।

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