डकैत की नीचता से शर्मसार हुआ चम्बल

मात्र कुछ दिनों पहले ही जेल से जमानत पर रिहा हुए पूर्व कुख्यात डकैत जगन गुर्जर उर्फ भैंडा ने गत बुधवार को पहले तो चंबल की गोद में मौजूद बाड़ी शहर में हाॅस्पीटल के सामने चाय के पैसे मांगे जाने पर दुकानदार की अपने साथियों के साथ मिलकर मारपीट कर दी। इसके अलावा आम नागरीकों में अपनी दहशत और आंतक फैलाने के लिए ताबड़-तोड़ हथियारों से गोलीबारी कर फरार हो गया।

इसके बाद स्कार्पिओ कार में अपने साथियों के साथ सवार होकर थाना बसई डांग अन्तगर्त करणसिंह का पुरा पहुंचा। वहां एक घर के सामने कार रोक कर और हवा में गोलियां चलाते हुये घर में पहुंचा। पहले तो उसने और उसके साथियों ने पूरे घर की तलाशी लेते हुये मर्दों को ढूंढा, मगर जब कोई पुरुष नहीं मिला तो वहां मौजूद दो महिला और बच्चों की पिटाई करने लगा। जब इससे भी मन नहीं भरा तो उसने महिलाओं को घर से बाहर निकालकर बंदूक की दम पर उनके कपड़े उतरवाये।

इसके बाद जगन ने नीचता की सारी हदें लांघते हुये उन महिलाओं को बंदूकों की दम पर ही निर्वस्त्र एक घण्टे तक पूरे गांव की पगडंडियों पर चलवाकर मां चंबल और चंबलवासियों का सिर शर्मशार कर दिया।

जगन गुर्जर उर्फ भैंडा महिलाओं के साथ ये अमानवीय कृत्य करते समय यह भूल गया कि इस चंबल में उससे भी बड़े और खूंखार बागी (डकैत) रहे हैं। मगर किसी महिला या महिलाओं को निर्वस्त्र करना तो बहुत बड़ी बात होती थी किसी का को छूना भी बागी और उसका गैंग गुनाह समझता था। दस्यु सम्राट मोधौसिंह रहे हों, मलखान सिंह चाहें वे डौंगर-बटीरी रहे हों या फिर कोई भी दस्यु सम्राट रहे हों महिलाओं को सभी ने देवी और चंबल की इज्जत माना।

चंबल के बेहड़ों में पनाह लेने वाले दस्युं के गैंगों में उसूल तो इतने पक्के थे कि डकैती के दौरान या फिर कभी भी गैंग का कोई सदस्य किसी महिला के साथ बदतमीजी भी कर देता था तो सरदार के आदेश पर तत्काल उस सदस्य में गोली मार दी जाती थी। उस चंबल में जगन की ये घृणित घटना बताती है कि अब उसमें और पशु में कोई अन्तर नहीं रह गया है।

कभी 11 लाख का इनामी और 25 सदस्यों वाले गैंग का मुखिया रह चुका जगन गुर्जर अब तक तीन मर्तबा आत्म समर्पण कर चुका है। जगन को शक था कि पीड़ित महिलाओं के पतियों ने उसकी मुखबिरी की थी।

चूकी गांव में पानी का भंयकर टोटा पढ़ गया है तो उस घर के सारे पुरुष अपने मवेसियों को लेकर किसी सुरक्षित इलाके में चले गए थे।नहीं तो संभव है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जगन के नाम दर्ज 80 केसों में हत्या के मामले और दर्ज हो जाते। चंबल के दस्युओं में महिलाओं के प्रति मान्य संस्कृति के बिपरीत आचरण करने वाले जगन को याद रखना चाहिए कि जैसे वो न्याय न मिलने पर बागी या खूँखार डकैत बनने का दावा करता है,

उसी तरह इन महिलाओं पर जब उसने घृणित और मानवता को शर्मसार कर देने वाले अत्याचार किये तब उनके बच्चे भी उनके साथ थे। कहीं ऐसा न हो कि जिस न्याय की तलास में तुम्हें चंबल की शरण में आना पड़ा वे भी एक दिन न्याय की तलास में चंबल के बेहड़ों में कूंद जायें। क्योंकि धौलपुर पुलिस महिलाओं के अपमान की बात तो मान रही है। मगर निर्वस्त्र करने की घटना को सिरे से खारिज कर रही है। चंबल में न्याय- अन्याय का खेल पुलिस और पटवारियों की पोटली से शुरु और खत्म होता है।

श्रीगोपाल गुप्ता (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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2 thoughts on “डकैत की नीचता से शर्मसार हुआ चम्बल

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  2. न समर्पण किया न सुधार हुआ, मौत से बचने जेल गया था, पकड़कर फिर वहीं डाल देना चाहिए

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