क्या बिजली जाने की सारी जिम्मेदारी केवल विभाग और सरकार की है?

इन दिनों पूरा भारतवर्ष विशेषकर उत्तर भारत आग की लपटों की चपैट में है। पारा नित नये रोज अपना ही रिकाॅर्ड तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाने की जिद में आ गया है, परिणाम खतरनाक रुप से सामने है।ऐसा कभी भी नहीं हुआ जो अब इस वर्ष में हो रहा है। कुछ अपवाद शहरों को छोड़ दें तो पारे ने कई महानगर और शहरों को 50-50 डिग्री सेल्सियस तापमान में प्रकृति के सामने घुटने को मजबूर कर दिया है।

इस त्राहीमाम-त्राहीमाम हालातों के बावजूद आम नागरीक किसी भी तरह सूर्य भगवान के जानलेवा प्रकोप से अपने आपको बचाने की पूरी जुगत में लग गया है और वो सभी इंतजाम कर रहा है जिससे वो और उसका परिवार किसी तरह जीवित और स्वस्थ रह सके। मगर उसकी परेशानियों में बिजली की घोषित और अघोषित कटौती ने भयंकर इजाफा कर दिया है।

हालात इतने संगीन हो चले हैं कि इस जानलेवा गर्मी में बिना बिजली के आम नागरीक बहुत बुरी स्थिति में आ गये हैं, चूकी बिजली नहीं तो पानी नहीं क्योंकि आज के इस दौर में पानी और बिजली पूरी तौर एक दूसरे पूरक हो गये हैं। मगर ऐसा नहीं है कि राजस्थान, उप्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़ आदि राज्य बिजली कटौती के संकट के साये में नहीं हैं, मगर अपने प्रदेश मध्य प्रदेश में बिजली कटौती का संकट कुछ ज्यादा ही है, वो तब जब प्रदेश में बिजली की मात्रा भरपूर और सरप्लस है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिजली कटौती के लिए क्या बिजली विभाग और राज्य सरकार ही जिम्मेदार है? या फिर प्रकृति की जिद के सामने सब प्रयास फैल हैं?

अपनी कड़े विरोध के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में विख्यात है, कहा भी जाता है कि देश में भाजपा से अच्छा विरोध कोई राजनैतिक दल नहीं कर सकता है। प्रदेश में भी विपक्ष भाजपा पूर्ण-रुपेण बिजली कटौती के मुद्दे को जनता के समक्ष दमदारी रख रहा है, इससे सरकार भी चिंतित है। मगर हकीकत यह भी है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार भी बिजली को लेकर पूर्णतः सजग है। प्रत्येक तीन -तीन घण्टों में भोपाल में बैठे उच्च अधिकारी प्रत्येक जिले के बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों से बिजली सप्लाई और समस्याओं के संबंध में जानकारी ले रहे हैं और बिधुत सप्लाई अनवरत जारी रहे इसके पूरे प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं बिजली की समिक्षा कर रहे हैं। इधर भारी लोड के कारण थरथरा रहे ट्रांसफार्मोरों को बलास्ट या खराब होने से रोकने के लिए बिजली विभाग के अतिरिक्त व सहायक यंत्री एंव अन्य कर्मचारी दिन-रात चोबीस घण्टों ट्रांसफार्मोरों के सामने कूलर, पंखें और चारो तरफ जूट के टाटों को लगाकर उन पर 24 घण्टे पानी डालकर ठंडा रखने का काम कर रहे हैं और भंयकर गर्मी में खो चुके अर्थिंग के गड्डों में पानी के टैंकर उड़ेल रहे हैं जिससे अर्थिंग बनी रहे और घरों में 24 घण्टे बिजली पहुंचती रहे।

बिजली विभाग इन दिनों आपातकालीन समय का सामना कर रहा है, सभी छोटे और बड़े अधिकारी, कर्मचारियों की सभी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। बावजूद इसके बिजली संकट मौजूद है तो उसका बड़ा कारण है  भंयकर तापमान के कारण बड़ी-बड़ी और सुरक्षित मोटी-मोटी केवलों का चिपककर दम तोड़ना और लाइनों का अचानक वस्ट होना, बिजली उपकरणों का संधारण (मेंटीनैंस) जो अप्रैल माह में होना था, मगर चुनावों के कारण नहीं हो सका, वो अब इस भीषण गर्मी में किया जा रहा है।

फिर भी हम आशा कर सकते हैं कि सरकार और मजबूत विपक्ष के होते हुये हमें अकारण बिजली कटौती का सामना नही करना पड़ेगा। फिर अब प्रदेश में मानसून के भी दर्शन होने का समय हो चला है जो प्रदेश वासियों में उम्मीद जगाये हुयें हैं कि उनके दर्शन मात्र से और बरसने से ही ट्रांसफार्मर और अर्थिंग की स्थिति मजबूत होगी और हमें और बिजली विभाग और सरकार को इस नारकीय व जानलेवा भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।

— श्रीगोपाल गुप्ता (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं, यह उनके निजी विचार हैं.)

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1 thought on “क्या बिजली जाने की सारी जिम्मेदारी केवल विभाग और सरकार की है?

  1. चुनाव के दौरान की भूल का नतीजा और वोटों के लिए पिछली सरकार की करतूत का भी

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