ऐसे भी होते हैं थानेदार, चम्बल में सामने आया पुलिस का नया चेहरा

कई बार सरकार और पुलिस के उच्च अधिकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली सुधारने, उसकी क्रूर छवि दूर करने और समाज के प्रति मित्रवत बनाने की कोशिश की, इसके वाबजूद न उसकी छवि बदली, न तौर तरीका। सब कुछ आज भी वैसा ही है जैसा, अंग्रेजों के जमाने में रहा बताया जाता है।

तमाम सुधारों और सुधार के प्रयासों के वाबजूद पुलिस की क्रूरता और पक्षपातभरी कार्रवाई की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। ऐसे में अगर बात चम्बल की जावे तो कई लोंगों के रौंगटे खड़े हो सकते है, केवल इस नाम से ही भय की सिहरन दौड़ सकती है। मालूम होगा कि, डाकुओं – बागियों की शरण स्थली के रूप में पूरी दुनियां में पहचाने जाने वाले चम्बल की पुलिस को यहां की जनता डकैतों से भी खराब मानती रही है।

इसी चम्बल के एक थाने से अब एक ऐसी खबर सामने आई है जो पुलिस की मौजूदा छवि से कतई मेल नहीं खाती। यह खबर पुलिस की एक नई तस्वीर दिखाती है। इस तस्वीर के चित्रकार हैं मनीष शर्मा। इसके लिए भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिस अफसरों ने तो मनीष शर्मा की प्रशंसा की ही, सोशल मीडिया पर भी उनकी सराहना हो रही है।

मनीष शर्मा पुलिस निरीक्षक हैं। दो रोज पहले ही भिंड के जिला पुलिस अधीक्षक रुडोल्फ अल्वारेस ने उनको मेहगांव थाने की कमान सौंपी थी। शनिवार की सुबह जब वर्षा जाटव नाम की एक 32 वर्षीय महिला बेहद दुखी और परेशान होकर उनके सामने पहुंची और आवेदन देते हुए बताया कि उसका पति उसको बेहद परेशान करता है। न केवल वह परेशान करता है बल्कि उसने खुद अपने हाथों से सुहाग के प्रतीक पैरों के बिछिया और मांग का सिंदूर मिटा दिया और घर से दो छोटी छोटी बच्चियों के साथ बाहर निकाल दिया।

यह सुनकर इंस्पेक्टर मनीष शर्मा पिघल गए और महिला की समस्या दिल को छू गई । उन्होंने मामले में पूरी तत्परता दिखाते हुए झट से महिला के पति मनोज जाटव को पास के गांव सोनी से बुलवाया और दोनों को समझा-बुझाकर सुलह करवाई।


पुलिस अधिकारी ने मनोज को समझाया कि तुम्हारा परिवार उजड़ जाएगा, तुम्हें अपनी पत्नी को परेशान नहीं करना चाहिए। लेकिन पत्नी को भरोसा नहीं बैठ रहा था। वर्षा बोल रही थी कि यह कल से फिर परेशान करेगे। तब इंस्पेक्टर मनीष शर्मा ने वर्षा को भरोसा और सुरक्षा का विश्वास दिलाने के लिए कहा कि वर्षा आज से तुम मेरी छोटी बहन हो। अब यह आपको परेशान नहीं कर पाएगा मैं तुम्हें सुरक्षा का वचन देता हूं और वचन के रूप में तुमसे आज यही पर राखी बंधवा लूंगा जिससे तुम अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करोगी। यही नहीं मनीष शर्मा ने थाने में ही मनोज जाटव के हाथों से वर्षा की मांग भी भरवाई।

थाना प्रभारी के इस पावन संवेदनशील और अनुकरणीय कार्य से वर्षा इतनी प्रभावित हुई कि वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी। वर्षा खुश होकर पूरी तरह से भरोसे और सुरक्षा के साथ अपने पति के साथ अपने गांव अपनी दो 3 और 5 वर्षीय छोटी-छोटी बच्चियों के पास अपने घर वापस लौट गई।

मेहगांव थाना इंस्पेक्टर मनीष शर्मा के द्वारा जो संवेदनशीलता और तत्परता वर्षा जाटव के मामले में दिखाई और वर्षा को राखी बंधवा कर बहन बनाया गया। उसके फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। मनीष शर्मा जैसे पुलिस अधिकारी यदि थानों में हो तो निश्चित ही उस थाना क्षेत्र का कोई व्यक्ति दुखी या परेशान या फिर अपने आप को कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं कर सकेगा। लोग कह रहे हैं कि वास्तव में देशभक्ति और जनसेवा का जो नारा पुलिस लगाती है उसे साकार करने का काम मनीष शर्मा जैसे अफसर ही कर सकते हैं।

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