क्यों और कब से मनाया जाता है- तम्बाकू निषेध दिवस

31 मई शुक्रवार को पूरे विश्व में तम्बाकू दिवस मनाया गया। जगह – जगह कार्यक्रम आयोजित कर तम्बाकू और धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। इनसे होने वाले भयानक नुकसानों की भयावह तस्वीरें दिखाई गईं। नतीजतन कई लोगों ने तत्काल ही तम्बाकू और धूम्रपान से तौबा कर ली। यह अलग बात है कि, नशे के विरुद्ध कसम खाने वाले ज्यादातर लोग जल्दी ही अपनी कसम तोड़ते रहे हैं, ऐसा अब न करेंगे, विश्वास कैसे किया जा सकता है।

तम्बाकू से हर साल करीब दस लाख मौतें होती हैं। इससे बीमार होने वालों के इलाज पर निजी ही नहीं सरकारी खर्च भी होता है। तो सवाल उठता है कि- तम्बाकू, बीड़ी – सिगरेट, गांजा – भांग, शराब जैसी चीजों का निर्माण और व्यापार ही क्यों होता है? इसका जवाब कौन देगा।

एक तरफ हम ऐसी हानिप्रद चीजें बनाते – बेचते हैं, दूसरी तरफ उनके सेवन से नुकसान की चेतानी भी देते हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को मध्य प्रदेश के राजगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू एवं धूम्रपान निषेध दिवस पर राजगढ़ जिला पंचायत के सभाकक्ष में कलेक्टर सुश्री निधि निवेदिता ने उपस्थित सभी शासकीय सेवकों को तम्बाकू एवं धूम्रपान के सेवन से दूर रहने की शपथ दिलाई। तंबाकू एवं धूम्रपान के उपयोग के विरोध में आम नागरिकों में जागरूकता लाने हेतु हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।

उधर प्रदेश के बड़वानी में आयोजित एक कार्यक्रम में जानेमाने विद्वान डॉ. मधुसूदन चौबे ने ऐसे ही कुछ सवालों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा- प्रायः यह देखने में आता है कि हमारे आसपास के माहौल में कम उम्र के बच्चे तंबाकू एवं धूम्रपान की लत में जकड़े दिखते हैं। जिससे समाज में अन्य नागरिकों पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में तमाम सवाल हैं जो लोगों के मन में उठते हैं।

मसलन, दुनिया में प्रतिवर्ष कितने लोगों की मृत्यु तम्बाकू के कारण होती है? भारत में औसतन कितने व्यक्ति तम्बाकू के कारण हर साल मौत के मुंह में समा जाते हैं? कितने पेसिव स्मोकर हर साल मारे जाते हैं? तम्बाकू भारत में कब आई? विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की घोषणा किसने की? पहली बार यह दिवस कब मनाया गया था? इसका उद्देश्य क्या है? भारत में सर्वप्रथम तम्बाकू कौन लाया? उस समय देश में किसका राज्य था? ये प्रश्न खासतौर से युवाओं के लिए सामान्य ज्ञान का विषय भी हैं।

चौबे ने बताया कि 1987 में संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। तदनुरूप 31 मई 1988 को प्रथम तम्बाकू निषेध दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य तम्बाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता उत्पन्न करके उनके सेवन से उन्हें परे रखना है ताकि लोगों को फेफड़े, हृदय आदि से संबंधित रोगों, रक्तचाप, कैंसर आदि से बचाया जा सके।

धन और स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाने वाली तम्बाकू के उपयोग की तरफ युवा पीढ़ी तेजी से बढ़ रही है, जो भयावह है। 2019 के विश्व तम्बाखू दिवस की थीम है – तम्बाकू और फेफड़ों का स्वास्थ्य। सत्रहवीं सदी में अकबर के समय तम्बाकू पुर्तगालियों के माध्यम से भारत में आई।

डब्ल्यू एच ओ के अनुसार प्रतिवर्ष सात मिलियन यानी सत्तर लाख लोग तंबाकू की वजह से पूरी दुनिया में मारे जाते हैं। भारत में यह दस लाख लोगों की जान ले लेती है। छह लाख के आसपास पेसिव स्मोकर मारे जाते हैं। तम्बाकू के कारण सर्वाधिक जानहानि भारत में होती है।

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