CM के डॉक्टर दामाद का घोटाला- 80 लाख की पुरानी मशीन खरीदी ढ़ाई करोड़ में


रायपुर . डीकेएस घोटाले की जांच में फंसे भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के दामाद डा. पुनीत गुप्ता पर जांच का शिकंजा और कस सकता है। उनके खिलाफ एक और बड़ी शिकायत सामने आई है कि उन्होंने डीकेएस के लिए एक मशीन ढाई करोड़ रुपए में चीन से आयात करवाई थी, जबकि भारत में वह मशीन केवल 80 लाख रुपए में ही उपलब्ध है।

यही नहीं जिस मशीन को विदेश से मंगाया गया है उसकी तकनीक पूरी दुनिया में आउटडेटेड (पुरानी) हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार यह तो पुनीत की गड़बड़ियों की एक झलक मातृ है। डा. राकेश गुप्ता ने पुनीत गुप्ता द्वारा किए गए इसी प्रकार के संदिग्ध साैदों तथा नियम विरुद्ध कार्यवाहियों का ब्योरा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को भेजा है। उन्होंने मांग की है की डीकेएस घोटले की जांच का दायरा बढ़ाया जाए।

डा. राकेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि, डी.के.सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल (डीकेएस) में घोटाला और उसकी जांच एक बड़ा जन चर्चा का विषय बन रहा है. आगे बढ़ रही जांच ने यह साबित किया है कि इस जांच और भी आयाम हो सकते हैं. उदाहरण के तौर पर कुछ तथ्य मैं आपके सामने रख रहा हूं :

  • डी.के.एस. सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ पुनीत गुप्ता ने डायलिसिस का टेंडर अन्य पांच मेडिकल कॉलेज के लिए भी वेंडर फर्म के साथ कर लिया है, डाॅ. पुनित गुप्ता इस कान्ट्रेक्ट अधिकार नहीं रखते थे. जिसकी अभी तक अनदेखी की गई है .सभी कॉन्ट्रैक्ट और टेंडर की जांच वित्तीय और विधि विशेषज्ञ से की जानी चाहिए.
  • डी.के.एस. सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल में लगाई गई मशीनें बाजार की प्रचलित दरों से अत्याधुनिक और उत्कृष्ट कंपनियों से परे हटकर कई गुना दरों पर खरीदी गई हैं, जैसे लिथोट्रिप्सी की उत्कृष्ट कंपनी की मशीनें अधिकतम अस्सी लाख रुपए तक आती है . लेकिन डीकेएस में यही मशीन चीन से आयातित कर लगभग ढ़ाई करोड़ में खरीदी गई . अब लिथोट्रिप्सी की तकनीक पूरे विश्व में अपने आप में आउटडेटेड हो चूकी है. इसी प्रकार कई गैरजरूरी मशीनें डीकेएस में खरीदी गई हैं.
  • पूरे टर्न की टेंडर की प्रोजेक्ट में भी बहुत बड़े घपले के आशंका है.
  • न्यूरो सर्जरी और माइक्रो सर्जरी के लिए प्रयुक्त होने वाला ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप जर्मनी की कार्ल जाइस द्वारा निर्मित 1.70 करोड़ में देश में आसानी से उपलब्ध है. लेकिन मशीन को चीन से आयातित कर इसी कंपनी का यह माइक्रोस्कोप 2.5 करोड़ के आसपास का खरीदा गया. इसी प्रकार की खरीदी प्रदेश में अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में की गई है.

डीकेएस सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल में खरीदी गई मशीनों की जांच उत्कृष्ट बायोमेडिकल इंजीनियर की मदद से कराया जाना जरूरी है, ताकि मशीन के अंदर लगे उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता की जांच की जा सके. डीकेएस सुपर स्पेश्यालिटी के लिए बनाई गई जांच समिति उच्चाधिकारी प्राप्त नहीं थी. और उसने केवल कुछ बिंदुओं पर जांच की है.

आपसे अनुरोध है कि मुख्य सचिव की निगरानी में एक कमेटी बनाई जाए जो सीजीएमएससी और डीकेएस सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल में हुए संगठित घोटाले की जांच का दायरा बढ़ाएं और दोषियों की पहचान कर दंड दिलवाए।

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