रोहिणी नक्षत्र में चार ग्रहों का परिवर्तन तपिश के साथ देगा राहत की बूंदें भी

उज्जैन. पंचागीय गणना के अनुसार 25 मई शनिवार को रात्रि 8.23 बजे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। सूर्य का रोहिणी में प्रवेश काल 15 दिवस का रहेगा। इस दौरान चार ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन भी होगा। इससे नवतपे में तेज गर्मी व उमस के साथ वर्षा के योग बनेंगे।

नवतपा के दौरानबन रहे बर्षा के योग से हल्की बारिस की भी संभावना है। इस तरह हल्की बारिस यानि राहत की बूंदें बरसने से जनमानस को गर्मी से राहत मिलेगी। ज्योतिषियों के अनुसार रोहिणी का प्रभाव वर्षा ऋतु में सामान्य वृष्टि के रूप में नजर आएगा। धान्य व फलों का उत्पादन श्रेष्ठ रहेगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में गोचर 15 मई से शुरू होगा। इस राशि में सूर्य 15 जून तक रहेंगे। इस बीच 25 मई को रात्रि 8.23 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस दिन से नवतपे की शुरुआत होगी।

नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो नवतपा में 27 मई से चार ग्रह नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं। इनका प्रभाव रोहिणी में मौसम परिवर्तन तथा वर्षा ऋ तु में वृष्टि चक्र में अलग-अलग नजर आएगा।

इन ग्रहों का होगा नक्षत्र परिवर्तन:

27 मई को शाम 6 बजे शुक्र ग्रह का कृतिका नक्षत्र में प्रवेश होगा। कृतिका नक्षत्र के स्वामी अग्निदेव हैं। शुक्र का जब कृतिका नक्षत्र में प्रवेश होता है और सूर्य से तपिश के योग बनते हैं तो वर्षा ऋ तु में बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है।

29 मई को शाम 5.58 बजे बुध ग्रह का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश होगा। कृतिका बुध का नक्षत्र है। लेकिन चंद्रमा का पुत्र होने के कारण यह सूर्य के रोहिणी काल में वर्षा की स्थिति निर्मित करेगा। लगातार बारिश के योग बने रहेंगे।

31 मई को सुबह 11.30 बजे वक्री गुरु का ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश होगा। वक्री गुरु ज्येष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र के स्वामी इंदा हैं। इन्हें वर्षा का कारक माना जाता है। गुरु का वक्रत्व काल होने से देश में खंड वृष्टि होगी।

7 जून को सुबह 7.40 बजे मंगल ग्रह का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश होगा। यह स्थिति विशेष योग का निर्माण करेगी। पुनर्वसु नक्षत्र की स्वामिनी अदिति हैं। इसलिए वर्षा ऋ तु के लिए किए जाने वाले पर्जन्य आदि अनुष्ठान सफल होंगे।

रोहिणी का वास समुद्र तट पर:

ज्योतिर्विद के अनुसार वर्षा के ऋ तुचक्र निर्माण में रोहिणी व समय का वात तथा मेघों का विशेष महत्व होता है। इस बार रोहिणी का वास समुद्र तट पर तथा समय का निवास धोबी के घर होगा। इसका प्रभाव उपयोगी बारिश के रूप में नजर आएगा। पुष्कर मेघ अन्न्, धान्य तथा फलों के उत्पादन में वृद्धि कराएगा। मेघेश शनि का फल देश के कुछ हिस्सों में वर्षा की कमी के रूप में नजर आएगा।

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