Good News; अब रेडीमेड दीवारों से तैयार करें अपना मकान

सस्ती, सुंदर, टिकाऊ, कम समय में तैयार, हर मौसम के अनुकूल और पर्यावरण के लिए सीमेंट – कंक्रीट के मकानों से कई गुणा कम हानिकारक होंगे ऐसे मकान

ग्वालियर. जब हम अपने स्वयं के मकान की योजना बनाते हैं तो मकान बनवाने या किसी से खरीदने की सोचते हैं. बनवाने में तरह तरह का सामान खरीदना होता है, जिसका अनुभव नहीं होता. साथ ही कारीगरों के साथ खड़ा रहना पड़ता है. इन सब में हमारा समय व धन अतिरिक्त रूप से नष्ट होता है, विभिन्न हानियां – परेशानियां अलग.

इन तमाम हानियों – परेशानियों से हमें निजात दिलाने के लिए अब रेडीमेड दीवारें उपलब्ध होने लगी हैं. हमें केवल अपनी इच्छानुसार दीवारें खरीदकर फिट करवाना है, और हमारा नये मकान का सपना पूरा. आईआईटी मद्रास ने ऐसी ही रेडीमेड दीवारों से एक शानदार बिल्डिंग बनाई है.

नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में न्यू सस्टेनेबल बिल्डिंग सिस्टम पर हुए विमर्श के बाद यह महत्वपूर्ण जानकारी मिली है कि, नई तकनीक में अब रेडिमेड दीवारें तैयार की जा सकती हैं। इन्हें बनवाकर सिर्फ फिट कराना होगा। ग्लास फाइबर रेनफोर्स जिप्सम तकनीक से अब रेडीमेड दीवारें तैयार की जा रही हैं, जिसे सिर्फ आपको जगह पर फिट करना है। ये टिकाऊ और काफी सस्ती हैं। इन दीवारों को जिप्सम से तैयार किया जाता है, जो एक तरह के साॅफ्ट स्टोन या मिनरल से बनता है।

कांक्रीट से बनीं दीवारों में गर्म होने की समस्या अधिक होती है। साथ ही 1000 ग्राम कांक्रीट 900 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड पर्यावरण में निष्कासित करती है। लेकिन जिप्सम से ऐसी कोई हानि पर्यावरण को नहीं होती बल्कि इसे भूकंप से भी खतरा नहीं है। कांक्रीट की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा जल्दी तैयार होती है, रिसाइक्लेबल व हल्की है। इस दीवार को तैयार करने में स्टील, रेत, पानी, सीमेंट जैसे मटेरियल नहीं उपयोग होते। आईआईटी मद्रास ने भी जिप्सम से तैयार बिल्डिंग बनाई है। इसमें और संभावनाएं खोजने के लिए भी वहां रिसर्च चल रही है।

आईटीएम में नेशनल टेक्नालॉजी डे पर प्रेजेंटेशन :
न्यू सस्टेनेबल बिल्डिंग सिस्टम पर आधारित टेक्नोलॉजी की विशेषताओं और संभावनाओं पर यह जानकारी शनिवार को प्रो. निखिल नंदवानी ने दी। वे आईटीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल टेक्नोलाॅजी डे-2019 में प्रजेंटेशन दे रहे थे। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न डिपार्टमेंट की फैकल्टीज ने विभिन्न क्षेत्रों की नई तकनीकों, भविष्य और सामाजिक तौर पर लाभ व प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की।

इस मौके पर डीन इंटरनेशनल कॉपरेशन एंड प्रोजेक्ट्स व डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के एचओडी डाॅ. योगेश चंद्र गोस्वामी ने ‘लाइट बेस्ड टेक्नोलाॅजीः सस्टेनेबल साॅल्यूशन्स फाॅर द फ्यूचर’ पर प्रजेंटेशन दिया। इसमें उन्होंने एंटीरिफ्लेक्शन ग्लास, लेजर और एलईडी लाइट के भविष्य के बारे में बताया। वहीं असिस्टेंट प्रो. नदीम फैजल ने ‘एडवांसमेंट इन एडिटिव एंड डिजीटल मैन्युफैक्चरिंग’ पर प्रजेंटेशन देकर विषय के सारे पक्षों को समझाया।

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