विदेशी मीडिया ने मोदी को बताया- लोकतंत्र का खतरा

भारतीय मीडिया करता है मोदी की तारीफ, विदेशी मीडिया बता रहा- देश को बांटने वाला और लोकतंत्र के लिए खतरा

नई दिल्ली. तथ्यपरक और सटीक समाचार देने के लिए दुनियांभर में पहचानी जाने वाली प्रसिद्ध अमेरिकी समाचार पत्रिका “टाइम”ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का बंटवारा करने वाला तो “दि इकनॉमिस्‍ट” ने लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। गौरतलब है कि, तकरीबन पूरा भारतीय मीडिया मोदी की तारीफ में कसीदे कढ़ता है लेकिन विदेशी मीडिया के बारे में मान जाता है कि, वह बिकता नहीं सच कहता है।

हाल ही में टाइम ने एक बार फिर अपने आवरण पर पीएम नरेन्द्र मोदी को छापा है, लेकिन इस बार उनके लिए जो विशेषण लिखा है, वह है- ‘’डिवाइडर-इन-चीफ़’’ यानी सबसे बड़ा बांटने वाला शख्‍स।

मालूम हो कि, यह पहली बार नहीं जब, टाइम पत्रिका के कवर पर नरेंद्र मोदी छपे हैं। इससे पहले मई 2015, जून 2014 और मार्च 2012 के अंक में भी टाइम के कवर पर मोदी की तस्‍वीरें छप चुकी हैं। पहली बार मोदी को लिखा था- कारोबारी। दूसरी बार- 1.2 अरब लोगों को मोदी के अगले कदम का इंतजार है। और तीसरी बार 2015 में लिखा था- कि आखिर मोदी भारत के लिए क्‍यों इतना मायने रखते हैं।

लेरिन इस बार मोदी को लेकर टाइम ने एकदम नकारात्‍मक राय जाहिर की है और उन्‍हें देश को बांटने वाली सबसे बड़ी ताकत बताया है।

माना जाता है कि टाइम पत्रिका का कवर दुनिया में होने वाले बदलावों को रेखांकित करता है। जिस तरीके से बीते सात वर्ष में टाइम की राय मोदी को लेकर बदली है, उससे अंदाजा लगता है कि अंतर्राष्‍ट्रीय मीडिया में भारत के चुनावों के परिणाम का आकलन कैसे किया जा रहा होगा।

पत्रिका में ‘डिवाइडर-इन-चीफ़’’ से जुड़ी एक स्‍टोरी भी है, आतिश तासीर की लिखी कव्हर स्टोरी का शीर्षक है- ‘’क्‍या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार के पांच साल और झेल सकता है?” स्‍टोरी में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के विचार की तुलना भारत में वर्तमान सांप्रदायिक तनावों से की गई है। टाइम की इस स्‍टोरी में 2002 के गुजरात दंगे को भी याद किया गया है।

उल्लेखनीय है, इससे पहले मशहूर पत्रिका दि इकनॉमिस्‍ट ने भी नरेंद्र मोदी पर कव्हर स्‍टोरी दी थी और उन्‍हें ‘’एजेंट ऑरेन्‍ज’’ की संज्ञा दी थी। बीते 2 मई को प्रकाशित स्‍टोरी का शीर्षक था, ‘’नरेंद्र मोदी के मातहत भारत की सत्‍ताधारी पार्टी लोकतंत्र के लिए खतरा है’’।

इस पत्रिका ने स्‍टोरी में यह भी प्रमुखता के साथ लिखा था कि- ‘मतदाताओं को नरेंद्र मोदी की सरकार को अपना मत देकर सत्‍ता से बाहर कर देना चाहिए या फिर गठबंधन सरकार बनाने के लिए विवश करना चाहिए।’

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