SC का फैसला; अब सभी कॉलेजों के प्रोफेसर 65 की उम्र में होंगे रिटायर, शिवराज सरकार ने किया था पक्षपात

भोपाल. देश की शीर्ष अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में मध्य प्रदेश के शत-प्रतिशत शासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालययों में कार्यरत प्रोफेसर्स की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने का आदेश दिया है। बुधवार को सर्वोच्च अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए मध्य प्रद्श अशासकीय महाविद्यालययीन (अनुदान प्राप्त) प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, महासचिव डॉ. डीके दुबे, कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन और सीनियर एडवोकेट एलसी पटने ने संयुक्त रूप से दी।

बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि, शासन से अनुदान प्राप्त प्राध्यापकगण भी शासकीय कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने सन 2010 में शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की तो रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष कर दी थी जबकि अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु में ही रिटायर किया जा रहा था।

तत्कालीन सरकार के उक्त पक्षपातपूर्ण व अन्यायकारी निर्णय के खिलाफ अनुदान प्राप्त शिक्षकों की तरफ से प्रांतीय संघ ने सड़क से लेकर सरकार तक और हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लम्बी लड़ाई लड़ी और बड़ी सफलता पाई जिससे पूरे राज्य के निजी कॉलेज के शिक्षकों में हर्ष की लहर दौड़ गई।

वरिष्ठ एडवोकेट एलसी पटने ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी इस दलील को भी माना कि, अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक भी शासकीय कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभों के हकदार हैं। उन्होंने बताया कि, माननीय सर्वोच्च अदालत ने उनके इस तर्क को भी सही माना कि सन 2004 में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में गठित कोऑर्डिनेशन कमेटी ने तय कर दिया था कि, अनुदान प्राप्त निजी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक, शासकीय कॉलेजों के शिक्षकों के समान ही माने जाएंगे तो फिर रिटायरमेन्ट की आयु में भेदभाव किया जाना न्यायसंगत नहीं बल्कि पक्षपातपूर्ण भी है।

श्री पटने ने बताया की 1973 के अधिनियम के तहत मप्र में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में कोऑर्डिनेशन कमेटी गठित की जाती है। कमेटी में प्रदेश के सभी कुलपति, रेक्टर्स और शासन उच्च अधिकारी रहते हैं। अतः उक्त कमेटी द्वारा लिया गया निर्णय राज्य सरकार पर बंधनकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना दिया।

प्रांताध्यक्ष डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार जिन शिक्षकों ने 62 से 65 वर्ष की आयु तक कार्य किया है उन्हें वेतन भी मप्र शासन को ही प्रदान करना होगा। संघ के सचिव डॉ. डीके दुबे ने बताया कि हम जल्द ही माननीय सर्वोच्च अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति उच्च शिक्षा विभाग में जमा कर शासन से निर्णयानुसार आदेश निकालने का आग्रह करेंगे।

प्रांताध्यक्ष डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय के संदर्भ में जल्द ही प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जा रही है। संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन ने प्रोफेसर्स के हक की इस जायज लड़ाई में साथ देने के लिए सभी शिक्षक साथियों का आभार माना।

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