राहुल आ रहे हैं, अनूप कहां हैं….

यह उल्लेखनीय है कि, अनूप मिश्रा के बारे में माना जाता है कि वह जो करते हैं- खुलकर करते हैं, जो कहते हैं- सामने कहते हैं, इसलिए वह भाजपा में रहते हुए तो अपने उन साथियों को सबक सिखाऐंगे नहीं जो हर कदम पर उनके रास्ते में पत्थर बनने की कोशिश करते रहे हैं. इसलिए भी जरूरी है कि वह अपने शहर की जनता की मांग स्वीकार कर लें और भाजपा छोड़ ही दें.

प्रसंगवश: राकेश पाठक

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज सायं ग्वालियर आ रहे हैं. यहां वह अपने प्रत्याशी अशोक सिंह के लिए सभा लेंगे. मुख्य मंत्री कमल नाथ भी उनके साथ रहेंगे.

इस अवसर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अनुपस्थित रह सकते हैं. ग्वालियर के लिए सिंधिया एक प्रमुख नेता हैं, वाबजूद इसके उनकी आज राहुल गांधी के साथ अनुपस्थिति महत्वपूर्ण नहीं क्योंकि, सबको मालूम है कि वह खुद के चुनाव और उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी से मिली जिम्मेदारी में व्यस्त हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अंचल में आज होने वाली यात्रा की चर्चा के साथ ग्वालियर में प्राय: सभी राजनीतिज्ञों, पत्रकारों यहां तक कि, आम जनता में भी चर्चा में जो नाम सबसे ऊपर चल रहा है- वह किसी कांग्रेस नेता का नहीं बल्कि, एक भाजपा नेता का है.

ग्वालियरवासियों को बताने की तो जरूरत नहीं कि, आज की राजनीतिक चर्चा के यह प्रमुख भाजपा नेता हैं- अनूप मिश्रा. उनके बारे में जोरों से चर्चा है कि, आज राहुल गांधी के समक्ष वह भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ सकते हैं.

बतादें कि, अनूप मिश्रा के भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने की चर्चा पहले भी कई बार हुई है, जिसका उन्होंने हर बार साफ शब्दों में खंडन भी किया है. लेकिन जब से यह चर्चा शुरू हुई कि वह राहुल गांधी के साथ बुधवार को मंच पर दिखाई दे सकते हैं, तब से उमकी तरफ से कोई खंडन या संकेत नहीं आया.

ऐसी स्थिति में ग्वालियर की जनता में यह आशा बलवती होने लगी है कि, आज मिश्राजी, अनूप भाईसा’ब या अनूप जी कांग्रेस में चले ही जावेंगे.

जनचर्चाओं की बात करें तो, कहा जा सकता है कि, ग्वालियर की जनता भी अब श्री मिश्रा को राहुल के मंच पर देखना भी चाहती है. उसका कहना है कि, आखिर कोई कब तक चुप रहे, हर बार पार्टी ने उन्हें उलझनभरी सीटों से टिकट दिया. सरकार होते हुए भी उनके क्षेत्र के कामों को गति न दी गई. यही नहीं चर्चा तो यह भी है कि, कुछ वर्ष पूर्व हुए एक हत्याकांड में उनके परिजनों का नाम भी उनकी पार्टी भाजपा के नेताओं की साजिश से जोड़ा गया था.

साफ है कि, ग्वालियर की जनता और अनूप मिश्रा के तमाम प्रशंसक व साथी अब उन्हें कांग्रेस में देखना चाहते हैं, संभव है आज ऐसा हो भी जावे. यह अलग बात है कि, भाजपा में मंत्री व सांसद रह चुके स्व अटल बिहारी वाजपेयी के सगे भांजे अनूप मिश्रा साफ कहते रहे हैं कि, भाजपा से राजनीति शुरू की है तो भाजपा में अंत भी चाहता हूं.

खबरों के अनुसार इनकी तरह उपेक्षा का शिकार कई अन्य नेता भी भाजपा व अन्य दलों से आकर कांग्रेस का थाम सकते हैं.

लेकिन अब वह भाजपा है कहां, जिसे अटलजी, राजमाता या जोशी, अडवाणी जी जैसे नेताओं ने शुरू किया था? इसलिए संभव हैै अनूप मिश्रा आज अपने शहर की जनता की मांग स्वीकार कर लें.

यह उल्लेखनीय है कि, अनूप मिश्रा के बारे में माना जाता है कि वह जो करते हैं- खुलकर करते हैं, जो कहते हैं- सामने कहते हैं, इसलिए वह भाजपा में रहते हुए तो अपने उन साथियों को सबक सिखाऐंगे नहीं जो हर कदम पर उनके रास्ते में पत्थर बनने की कोशिश करते रहे हैं. इसलिए भी जरूरी है कि वह भाजपा छोड़ ही दें.

UPDATE:
समीक्षा भी होंगीं मंच पर
खबरों की मानें तो पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता भी राहुल गांधी सेे मिलने वाली हैं, उनकी कमल नाथ से विस्तृत चर्चा हो चुकी है. बता दें कि, श्रीमती गुप्ता भाजपा में जनसंघ के समय से जुड़े पूर्व मंत्री नरेश गुप्ता की पुत्रवधु हैं.
खबरों के अनुसार इनकी तरह उपेक्षा का शिकार कई अन्य नेता भी आज भाजपा व अन्य दलों से आकर कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं.

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