एक अद्भुत मंदिर, जिसे बनाया था भूतों ने

हालांकि दुनियां के कई देशों में आत्मा – परमात्मा, भूत – प्रेत, देवी – देवता, पुनर्जन्म के तथ्य मिलने लगे हैं, विश्वास भी किया जाने लगा है, लेकिन इसके वाबजूद भी इसमें कोई दो राय नहीं है कि पूरी दुनिया में आज भी हमारा भारत देश ही एक रहस्यमयी देश के रूप में विख्यात है।

इ देश से जुड़े अनेक रहस्य और रोचक किस्से और कहानियां सुनने को मिलती हैं। इस देश के हर राज्य में कुछ न कुछ ऐसा देखने, सुनने और पढ़ने को मिल ही जाता है, जो हम सभी को हैरान कर देता है। आपने भी भूतों से जुड़ी अनगिनत कहानियां सुनी होगी, इसी क्रम में भूतों से जुड़ी एक ऐसी स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे।

आपने भूतों के बारे खूब सुना होगा, लेकिन उस वक्त थोड़ा ज्यादा हैरान हो जाएंगे जब आप सुनेंगे कि इन भूतों ने मिलकर एक भव्य मंदिर का निर्माण कर दिया था। जी हां, वो मंदिर केरल और तमिलनाडु से 6 किमी दूर परमर्थनदम शहर में मौजूद है।

बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 4000 साल पुराना है, जो कि तीन नदियों से घिरा हुआ है। इस मंदिर का नाम आदि केशव पेरुमल मंदिर है। इस जगह को थिरूवत्तरु भी कहते हैं। श्रीपेरंबदूर नामक स्थान पर इस मंदिर को भूतपुरी भी कहते हैं। इसी स्थान पर महान संत श्रीरामानुजाचार्य का जन्म भी हुआ था।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इसी जगह भूतगण भगवान भोलेनाथ की आराधना किया करते थे। मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, एक बार महादेव जब तांडव नृत्य कर रहे थे, तब उनका नृत्य देखकर भूतों ने हंसना शुरू कर दिया। भूतों को हंसता देख भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने भूतों खुद से अलग होने का श्राप दे दिया।

महादेव के श्राप से व्याकुल सभी भूत ब्रह्माजी के पास पहुंचे। इसके बाद ब्रह्माजी ने सभी भूतों को वेंक्टेश्वर गिरि के दक्षिण दिशा में स्थित सत्यव्रत तीर्थ में भगवान केशवनारायण की आराधना करने की सलाह दी। अनवरत पूजा—अर्चना और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान केशवनारायण ने भूतों को अपने दर्शन दिए। भगवान केशवनारायण ने भूतों की श्राप मुक्ति के लिए अनंतसर नाम से एक सरोवर बनाया।

इस पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते ही सभी भूतगण श्राप से मुक्त हो गए और उनको फिर से उन्हें भगवान शिव की प्रियता मिली। श्राप मुक्त होने की ख़ुशी में इन भूतों ने भगवान विष्णु के लिए यह मंदिर बनवाया, जो आदि केशव पेरुमल मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस स्थान पर भूतों ने तपस्या की थी, इसलिए इसे भूतपुरी भी कहा जाता है।

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