हम सभी भगवान श्री राम की पूजा-अर्चना तो करते हैं, लेकिन कभी उनके गुणों को आत्मसात करने की कोशिश नहीं करते हैं। यदि हम मर्यादा श्रीराम के गुणों का पालन करें तो हमारा जीवन सुखमय बन जाए। मात्र आराधना करने से कोई बात नहीं बनती। आप रोज भगवान के सामने सिर झुकाओ और कर्म से कपटी बने रहो, ऐसा करने से आपको कभी भी शांति नहीं प्राप्त हो सकती है।

1- आचरण

वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। श्रीराम के आचरण में पवित्रता के दर्शन होते हैं। आज की अधिकांश युवा पीढ़ी आचरण से मतलबी और झूठी हो चुकी है।

2- पिता का आज्ञा पालन

माता कैकेयी ने महाराज दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए राज सिंहासन तथा राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। महाराज दशरथ तनिक भी नहीं चाहते थे कि उनका प्रिय पुत्र राम वन जाए, लेकिन भगवान राम जानते थे कि उनके पिता दशरथ मजबूर हैं इसलिए पिता का मान-सम्मान रखने के लिए सहर्ष वन को चले गए।

3- मातृ भक्ति

भगवान राम ने अपनी मां को हमेशा प्यार दिया, उनकी सेवा की। वन जाते समय भी उन्होंने अपने पिता दशरथ से सिर्फ यही कहा था कि मेरी अनुपस्थिति में आप मां कौशल्या का ध्यान रखिएगा। आज हमारे जीवन से मां की सेवा गायब ही हो चुकी है।

4- गुरु भक्ति

गुरु हमें ज्ञान देता है, जिसकी बदौलत हम अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं। लेकिन आज की तारीख में हम गुरु का कितना आदर करते हैं? क्या हम सभी गुरु की आज्ञा का पालन करते हैं? भगवान श्री राम ने हमेशा गुरु की भक्ति की और उनका आदर किया।

5- धैर्य

भगवान श्री राम ने विपत्तियों में भी अपना र्धर्य नहीं खोया। क्रोध उनके चेहरे पर कभी नजर नहीं आया। क्रोध से केवल नुकसान होता है। इसलिए यह गुण हमें भगवान राम जी से जरूर सीखनी चाहिए।

6- कर्म

कई बार हम कर्म नहीं करना चाहते हैं बस बैठे-बैठे फल की इच्छा करते हैं। भगवान श्री राम के लिए कुछ भी करना संभव था, फिर भी उन्होंने अपने सभी कर्म स्वयं किए। जब विष्णु के अवतार श्री राम ने अपने कर्म किए तो हम क्यों अपना कर्म करने से डरते हैं?

7- मानवता

मानवता से दूसरा बड़ा धर्म कोई नहीं है। श्री राम ने मानवता को ही सबसे बड़ा धर्म माना है। इसके लिए श्री राम हमेशा प्रयासरत रहे। आजकल लोग सड़क पर भी इंसान को मरता देख, उसकी मदद नहीं करते हैं।

8- धर्म की रक्षा

धर्म की रक्षा के लिए कोई आगे नहीं आता। यदि हमारा धर्म खत्म होगा तो हम खुद ब खुद खत्म हो जाएंगे। श्री राम से हमें यह बात सीखना चाहिए कि कैसे हमें धर्म की रक्षा करनी है?

9- नियति को स्वीकार करना

नियति से कोई नहीं लड़ सका है। नियति में जो लिखा हुआ है हमें वह स्वीकार करना चाहिए। यही काम भगवान श्री राम ने किया था। कभी नियति को बदलने की कोशिश इन्होनें नहीं की है।

10-निंदा करने से बचें

श्री राम ने कई बार यह शिक्षा दी है कि दूसरों की निंदा करने से बचना चाहिए। दूसरों की निंदा करने से इंसान तरक्की नहीं कर पाता है। अधिकांश लोग अपना अधिकांश समय दूसरों की ​निंदा करने में बर्बाद कर देते हैं।u

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