महाराष्ट्र में पक्षपात; बीजेपी को 15 दिन का, दूसरे दलों को केवल एक दिन का मौका?

महाराष्ट्र का सियासी संग्राम अब सुप्रीम कोर्ट में शिफ्ट हो चुकी है। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि, सरकार बनाने के लिए राज्यपाल की ओर से एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन पत्र लेने के लिए उसे समय नहीं दिया गया।

शिवसेना का कहना है कि राज्यपाल ने राजनीतिक दलों को बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया और आनन-फानन में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर दी है।

शिवसेना के वकील राजेश ईमानदार के अनुसार- ‘हमने महाराष्ट्र गवर्नर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। हमने याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की है। रजिस्ट्रार की ओर से आज सुनवाई को लेकर अब तक कोई सूचना नहीं मिली है। अगर आज सुनवाई नहीं होती है तो कल हम सुनवाई का प्रयास करेंगे।’

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति शासन अब महाराष्ट्र में लग गया है तो उसके खिलाफ भी याचिका दायर करने पर विचार किया जा रहा है और हमने जो याचिका में आधार रखे हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे, हमेंसुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।

मालूम हो कि, महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच सोमवार रात को शिवसेना ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से सरकार बनाने के लिए और अधिक समय मांगा था। लेकिन राज्यपाल कोश्यारी ने शिवसेना का यह अनुरोध ठुकरा दिया था।

सुको जस्टिस ने कहा- अवैध

राज्यपाल के इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीबी सावंत ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्यपाल के इस फैसले को अतार्किक और पक्षपातपूर्ण बताया है।

गौरतलब है कि 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित होने के 18 दिन बाद भी कोई भी पार्टी सरकार बनाने का दावा नहीं कर पाई है।

गौरतलब है कि सोमवार शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। इससे पहले शनिवार शाम को राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन बीजेपी ने सरकार बनाने में असमर्थता जताई थी। एनसीपी के सूत्रों से आ रही खबर के मुताबिक जब तक कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं होगी, तब तक वो शिवसेना के साथ नहीं जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सावंत ने कहा कि जब राज्यपाल बीजेपी को सरकार बनाने के लिए 15 दिन का समय दे सकते हैं लेकिन अन्य दलों को 24 घंटे से अधिक नहीं दे सकते? अतएव इसमें कोई शक ही नहीं है कि यह अवैध, पक्षपातपूर्ण और अनुचित है। एक पार्टी कह सकती है कि हम साबित कर सकते हैं कि हमारे पास सदन में बहुमत है। अभी तक सदन का गठन नहीं हुआ है। उन्हें समर्थन पत्र सौंपने की आवश्यकता नहीं है। वे कह सकते हैं कि हम अपना बहुमत साबित करेंगे।

दरअसल, हमेशा ऐसा ही होता है, जो पार्टी सरकार बनाने का दावा करती है उसे विधानसभा गठन के बाद बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा नहीं हुआ।

Conract :: RapazNews  

◊वाट्सएप पर भेजी सूचना आप तक पहुंचना अब संभव नहीं, इसलिए देश – दुनियां की ऐसी ही खबरों / वीडियो से हमेशा अपडेट रहने के लिए कृपया यहां दिख रहा Allow या Follow का बटन दवाऐं अथवा लाल घंटी बजाऐं. धन्यवाद.   सम्पर्क: रापाज न्यूज

loading...
News Reporter
इस वेबसाइट व यू ट्यूब चैनल के लगभग सभी खबरें तथा वीडियो आदि Dailyhunt, Google News, NewsDog, NewsPoint एवं UC News पर भी उपलब्ध हैं इसमें ज्यादातर चित्र सांकेतिक रहते हैं तथा इंटरनेट व सोशल मीडिया से उपयोग किए जाते हैं, इसलिए हम किसी कॉपीराइट का दावा नहीं करते. सम्पर्क: Mobile / WhatsApp : 91-9993069079 E-Mail : rapaznewsco@gmail.com
loading...
loading...
Join Group